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मीडिया का बोलबाला

Posted On: 31 Jul, 2011 Others में

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मीडिया को जितनी आज़ादी हमारे देश में है शायद अमरीका में भी न हो , मीडिया की आज़ादी का सम्मान करते हुए कहना चाहता हूँ की मनोरंजन के चैनलों की अश्लीलता तो हद पार कर ही रही है लेकिन अश्लीलता से बचने के लिए हम ख़बरों के चैनेल देखते हैं वहां तो उससे भी बुरा हाल है समाचार दिखा रहे हैं बम्ब ब्लास्ट का ,ब्रेक के नाम पर बिकनी पहने लड़की ,वासना से देखता पुरुष जैसे विज्ञापन परसारित कर रहे हैं दूसरी बात हम खबर देखते वक़्त किसी पीड़ित की पीड़ा को सुन कर उद्वेलित हो रहे होते हैं विज्ञापन आता है हँसते खिखिलाते चहेरों का | इन सब से जनता की संवेदनशीलता ख़तम हो रही है | किसी की पीड़ा ,दुःख व्यथा ,एक रूपक बन कर रह गयी है अब ये मीडिया वाले जो औरों से २४ केरत जैसी इमानदारी की अपेक्षा करते है वो अपने चैनेल का खर्चा निकालने के लिए व् अपने मालिकों को कमा कर देने के लिए जो भी दिखाते वो सब जायज है क्या | दूसरों का हिस्साब मांगते है की ११०० सो करोड़ कहाँ से आया दवाई क्यों बेचते हो ,ये तो व्यापारी है आदि बाते कर के जनता के सामने मजाक बनाते हैं | क्या मीडिया मालिक ये अश्लील विज्ञापन परोस कर कोई देश ,धर्म .या समाज की भलाई का काम कर रहें है | जिन व्यभिचारिओं को कोई सुनना भी पसंद न करे उनको ये सेलेब्रिटी के तौर पर प्रदर्शित करते हैं मीडिया वालों का तर्क है की हम तो वो दिखाते है जो जनता पसंद करती है क्या किसी का लड़का शराब या जुआ पसंद करेगा तो बाप उसे वो सुविधा देगा कुल मिला कर बात ये है की ( पर उपदेश कुशल भतेरे )

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Tamanna के द्वारा
August 1, 2011

सुभाष जी इसे लोभ ना कहें यह तो पत्रकारिता धर्म है…जब तक पैसा नहीं आएगा, काम नहीं चलेगा. !!! http://tamanna.jagranjunction.com/2011/08/01/commercialisation-of-relationships/

Santosh Kumar के द्वारा
July 31, 2011

सुभाष जी ,..सादर नमस्कार लोभी मीडिया पत्रकारिता की हत्या करने पर तुली हुई है ,. ” जनता की पसंद ” का नाम देकर जनता को वह सब देखने पर मजबूर किया जाता है जिससे सामाजिक नैतिकता का पतन हो ,..अच्छी वैचारिक पोस्ट के लिए धन्यवाद

    subhashmittal के द्वारा
    July 31, 2011

    संतोष जी ,उत्साहवर्धन के लिए मेरा आभार स्वीकारें


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